नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। गूगल के ‘चीफ इंटरनेट इवेंजलिस्ट’, विंटन सर्फ (Vinton Cerf) 83 साल की उम्र में अगले सप्ताह रिटायर हो जाएंगे। वह अपना पद छोड़ देंगे। उनके करियर को टेक्नोलॉजी के इतिहास का सबसे प्रभावशाली करियर कहा जा रहा है। दुनिया में उनका ओहदा एक ऐसे व्यक्ति का रहा है जिन्हें ‘इंटरनेट का जनक’ माना जाता है। उनके नाम पर डाक टिकट भी जारी किया जा चुका है। विंटन सर्फ बीते 20 साल से भी अधिक समय से गूगल से जुड़े हैं। वह कंपनी के शुरुआती समय में ही आ गए थे। उन्होंने टेलीफोन से फोन, फिर स्मार्टफोन, इंटरनेट और अब एआई को टेक्नोलॉजी में उतरते हुए देखा है। एक हालिया बयान में विंटन ने कहा है कि एआई एजेंट्स कंपनियों को एक ऐसा स्टैंडर्ड सिस्टम बनाने पर मजबूर कर देंगे, जिससे सभी सॉफ्टवेयर आपस में आसानी से जुड़ सकें। Ai पर यह टेक दिग्गज क्या विचार रखता है, आइए जानते हैं।
इंटरनेट सबके हाथ में था, लेकिन एआई की ताकत कुछ लोगों के पास
विंटन सर्फ ने हाल ही में एक कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया, जहां एआई के बारे में कई बातें हुईं। चर्चा इस बात पर केंद्रित थी कि आधुनिक एआई मॉडल अमीरों और बड़ी कंपनियों के हाथ में सिमट रहे हैं, जबकि इंटरनेट सबके लिए बराबर था। इस पर विंटन सर्फ ने भविष्यवाणी की- एआई एजेंट्स के आने से टेक कंपनियों को उन्हीं स्टैंर्ड प्रोटोकॉल की ओर लौटना होगा, जैसे प्रोटोकॉल टेक कंपनियों के लिए बनाए गए थे।
विंटन सर्फ ने कहा कि एआई का एजेंटिक मॉडल, जिसमें अलग-अलग जगहों के कई एजेंट्स एक-दूसरे से बातचीत करेंगे, कंपनियों को एक ऐसा स्टैंडर्ड सिस्टम बनाने पर मजबूर कर देगा जिससे सभी सॉफ्टवेयर आपस में आसानी से जुड़ सकें। विंटन की बात सही साबित होती है तो जो कंपनियां प्रोटोकॉल बनाने पर शुरुआत में काम करेंगी, उनका मार्केट में गहरा असर हो सकता है।
Ai के लिए अंग्रेजी नहीं परफेक्ट भाषा
विंटन की यह बात बहुत महत्वपूर्ण है। मौजूदा समय में अधिकतर एआई मॉडलों को अंग्रेजी भाषा पर ट्रेन किया जाता है। इस वजह से हिंदी में बात करने पर लोगों के अधिक टोकन खर्च होते हैं, लेकिन विंटन सर्फ, एआई के लिए अंग्रेजी को परफेक्ट भाषा नहीं मानते।
टेक क्रंच की एक रिपोर्ट के अनुसार, कॉन्फ्रेंस में पैनल के सदस्यों का मानना था कि एआई एजेंट्स के बीच आपस में बातचीत करने के लिए इंसानी भाषा जैसे- अंग्रेजी ही काफी होगी।
वहीं, सर्फ का मानना है कि अंग्रेजी इसके लिए सबसे अच्छा विकल्प नहीं होगी। उन्होंने कहा कि इस भाषा में लचीलापन तो है, लेकिन अस्पष्टता भी है। दो एआई एजेंट्स के बीच बातचीत में सटीकता होना बहुत जरूरी है।




